स्वस्थ शरीर ही धर्म और प्रगति का पहला साधन है
हमारे वेदों में कहा गया है—"शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्" यानी जीवन के सभी कर्तव्यों और लक्ष्यों को पूरा करने का सबसे पहला साधन हमारा स्वस्थ शरीर ही है। यदि एक परिवार का मुखिया बीमार पड़ जाए, तो पूरा परिवार आर्थिक तंगी में डूब जाता है। यदि एक बच्चा अस्वस्थ है, तो वह कभी अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं लगा सकता। दुर्भाग्यवश, भारत के ग्रामीण अंचलों में आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव है।
गाँवों में स्वास्थ्य की जमीनी सच्चाई
गाँव के लोगों को एक छोटी सी जांच या साधारण दवा के लिए भी 20 से 30 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। आर्थिक तंगी के कारण लोग छोटी बीमारियों को नजरअंदाज करते हैं, जो आगे चलकर गंभीर और असाध्य रोगों का रूप ले लेती हैं। महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) और बच्चों में कुपोषण एक गंभीर मौन समस्या बनी हुई है।
संस्था के निःशुल्क स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिविर
माया बाई लोधी स्मृति सेवा न्यास द्वारा समय-समय पर ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में विशाल स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाता है:
- विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परामर्श: सामान्य फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और नेत्र विशेषज्ञों द्वारा मरीजों की विस्तृत जांच।
- निःशुल्क नैदानिक जांचें (Lab Tests): ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन और ईसीजी की निःशुल्क जांच।
- मुफ्त दवा वितरण: जांच के उपरांत प्रत्येक जरूरतमंद मरीज को 15 से 30 दिनों की प्रामाणिक जीवनरक्षक दवाइयां पूरी तरह मुफ्त दी जाती हैं।
- नेत्र परीक्षण एवं चश्मा वितरण: बुजुर्गों के मोतियाबिंद की पहचान और दृष्टि दोष वाले जरूरतमंदों को निःशुल्क चश्मे प्रदान किए जाते हैं।
"स्वस्थ नागरिक और स्वच्छ पर्यावरण ही समृद्ध भारत की पहचान है।"