नारी स्वावलंबन: आत्मनिर्भर भारत की मजबूत आधारशिला
भारतीय समाज में सदियों से नारी को परिवार की रीढ़ माना गया है। लेकिन ग्रामीण और गरीब तबके में अक्सर महिलाएं चारदीवारी तक सीमित रह जाती हैं और छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहने को विवश होती हैं। जब एक महिला अपने हाथों के हुनर से पैसे कमाना शुरू करती है, तो उसका समाज और परिवार में सम्मान कई गुना बढ़ जाता है। उसके बच्चों को अच्छा पोषण और बेहतर शिक्षा मिलती है।
संस्था के निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र
माया बाई लोधी स्मृति सेवा न्यास द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष कौशल उन्नयन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में आधुनिक मशीनों और अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा निम्नलिखित पाठ्यक्रमों का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है:
- कटिंग एवं सिलाई-कढ़ाई (Fashion Designing & Tailoring): सूट, ब्लाउज, बच्चों के कपड़े और पारंपरिक परिधानों की आधुनिक कटिंग और सिलाई।
- हर्बल ब्यूटीशियन एवं ब्राइडल मेकअप: त्वचा की देखभाल, मेहंदी डिजाइनिंग और ब्राइडल मेकअप का पेशेवर प्रशिक्षण।
- हस्तशिल्प, अगरबत्ती व गृह उद्योग: स्थानीय कच्चे माल से दीये, मोमबत्ती, अचार-पापड़ और हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करना।
- डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता: स्मार्टफोन से यूपीआई (UPI) पेमेंट लेना, बैंक खाता संचालित करना और सरकारी सब्सिडी योजनाओं की जानकारी।
प्रशिक्षण के बाद सिलाई मशीन सहायता और रोजगार सृजन
केवल सर्टिफिकेट बांटना संस्था का उद्देश्य नहीं है। प्रशिक्षण पूरा करने वाली जरूरतमंद और विधवा बहनों को संस्था द्वारा निःशुल्क सिलाई मशीनें भेंट की जाती हैं ताकि वे अपने ही घर से बुटीक या सिलाई का काम शुरू कर सकें। आज सैकड़ों बहनें प्रति माह ₹8,000 से ₹15,000 तक सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं।