प्रकृति का असंतुलन और हमारा नैतिक दायित्व
वर्तमान समय में हम सब देख रहे हैं कि किस प्रकार मौसम चक्र पूरी तरह बदल चुका है। गर्मियों में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के पार जा रहा है, भूजल स्तर पाताल में चला गया है और नदियां सूख रही हैं। इसका सीधा कारण अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और कंक्रीट के जंगलों का विस्तार है। यदि हमने अभी अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए शुद्ध हवा, पानी और हरियाली की रक्षा नहीं की, तो इतिहास हमें कभी क्षमा नहीं करेगा।
'एक पेड़ माँ के नाम': प्रेम, श्रद्धा और प्रकृति का अनूठा संगम
संस्था द्वारा संचालित 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान केवल एक पर्यावरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक भावनात्मक आंदोलन है। माँ जिस प्रकार निस्वार्थ भाव से अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, उसी प्रकार यह धरती माँ और प्रकृति भी समस्त जीव-जगत को जीवन देती है। प्रत्येक नागरिक को अपनी माँ के नाम पर एक पौधा लगाने और उसे संतान की तरह पालने का संकल्प दिलाया जाता है।
"वृक्षारोपण केवल गड्ढा खोदकर पौधा लगाना नहीं है, बल्कि उस नन्हे पौधे के बड़े वृक्ष बनने तक उसके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाना है।"
संस्था के वृक्षारोपण अभियान के मुख्य बिंदु
- देशी और छायादार वृक्षों को प्राथमिकता: नीम, पीपल, बरगद, जामुन, आंवला, बेलपत्र और शीशम जैसे पौधों का रोपण, जो 24 घंटे ऑक्सीजन देते हैं और स्थानीय जैव विविधता को समृद्ध करते हैं।
- 1,000+ पौधों की निरंतर देखभाल: संस्था के स्वयंसेवकों को 5-5 पौधों की सुरक्षा, नियमित सिंचाई और ट्री-गार्ड लगाने का उत्तरदायित्व सौंपा गया है।
- विद्यालयों में इको-क्लब का गठन: स्कूली छात्र-छात्राओं को अपने जन्मदिन और विशेष उत्सवों पर पौधा लगाने की प्रेरणा दी जा रही है।