प्रतिभा किसी साधन की मोहताज नहीं होती
कच्ची झोपड़ियों, टूटे हुए छप्परों और मिट्टी के दीयों की रोशनी में पढ़ने वाले बच्चों में भी वही प्रतिभा और तेज होता है जो किसी महानगर के महंगे स्कूल में पढ़ने वाले छात्र में होता है। लेकिन अक्सर गरीबी और पैसों की कमी इन प्रतिभाओं के पंख कतर देती है। 10वीं या 12वीं में 90% अंक लाने के बावजूद एक होनहार छात्र जब आर्थिक तंगी के कारण किसी दुकान पर काम करने या मजदूरी करने पर मजबूर होता है, तो यह केवल उस परिवार की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की अपूरणीय क्षति होती है।
प्रोजेक्ट उड़ान 2.0 की संकल्पना और इसके प्रमुख उद्देश्य
माया बाई लोधी स्मृति सेवा न्यास ने इसी पीड़ा को समाप्त करने के लिए 'प्रोजेक्ट उड़ान 2.0' (Project Udaan) की शुरुआत की है। इस मिशन का एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के किसी भी मेधावी छात्र का उच्च शिक्षा का सपना केवल इसलिए न टूटे कि उसके परिवार के पास फीस के पैसे नहीं हैं।
प्रोजेक्ट उड़ान के 4 मजबूत स्तंभ
- 1. पारदर्शी टैलेंट सर्च एवं चयन: ग्रामीण व शहरी सरकारी विद्यालयों के प्राचार्यों और शिक्षकों की अनुशंसा तथा संस्था द्वारा आयोजित प्रतिभा खोज परीक्षा के आधार पर छात्रों का चयन किया जाता है।
- 2. उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षा मार्गदर्शन: इंजीनियरिंग (JEE), मेडिकल (NEET), सीयूईटी, क्लैट और सिविल सेवा की तैयारी के लिए अनुभवी मार्गदर्शकों द्वारा व्यक्तिगत काउंसलिंग दी जाती है।
- 3. तकनीकी संसाधन (टैबलेट एवं इंटरनेट सहायता): आधुनिक युग में बिना डिजिटल उपकरणों के उच्च शिक्षा की तैयारी असंभव है। चयनित छात्रों को डिजिटल टैबलेट और आवश्यक पाठ्य पुस्तकें प्रदान की जाती हैं।
- 4. आर्थिक छात्रवृत्ति संबल: कॉलेज दाखिले, छात्रावास शुल्क और परीक्षा फॉर्म की फीस में संस्था और इसके दानदाता सहयोगियों द्वारा सीधी आर्थिक सहायता दी जाती है।
"जब एक निर्धन परिवार का बच्चा पढ़कर सफल होता है, तो वह केवल एक नौकरी नहीं पाता, बल्कि अपनी आने वाली सात पीढ़ियों को गरीबी के दलदल से बाहर निकाल लेता है।"
हमारा संकल्प है कि हम समाज के प्रत्येक समर्थ नागरिक को इस पुनीत कार्य से जोड़ें ताकि अधिक से अधिक होनहार युवाओं को उच्च शिक्षा की नई उड़ान मिल सके।